रिश्तों से बड़ा निकला एक प्रशासनिक फैसला: 7 वर्षीय अर्पित की दर्दनाक कहानी ने झकझोरा समाज

गोंडा। कभी-कभी जिंदगी ऐसे सवाल खड़े कर देती है जिनका जवाब ढूंढ़ना मुश्किल हो जाता है। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से सामने आई 7 वर्षीय अर्पित की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसने इंसानियत, रिश्तों और सामाजिक जिम्मेदारियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अर्पित अपनी मां के

रिश्तों से बड़ा निकला एक प्रशासनिक फैसला: 7 वर्षीय अर्पित की दर्दनाक कहानी ने झकझोरा समाज

गोंडा। कभी-कभी जिंदगी ऐसे सवाल खड़े कर देती है जिनका जवाब ढूंढ़ना मुश्किल हो जाता है। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से सामने आई 7 वर्षीय अर्पित की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसने इंसानियत, रिश्तों और सामाजिक जिम्मेदारियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अर्पित अपनी मां के साथ पंजाब के लुधियाना से गोंडा आया था। बस अड्डे पर पहुंचते ही उसकी मां की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चार दिनों तक उनका इलाज चला। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके और उनकी मृत्यु हो गई। मां की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल था कि अब इस मासूम बच्चे का सहारा कौन बनेगा। अस्पताल प्रशासन और संबंधित लोगों ने परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की। रिश्तेदारों को फोन

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