Bulandshahr News: पूर्व भाजपा ब्लॉक प्रमुख की गला रेंतकर हत्या

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खुर्जा के जाहिदपुर कलां निवासी पूर्व भाजपा ब्लॉक प्रमुख की रविवार सुबह गला रेतकर हत्या कर दी गई। खून से लथपथ शव घर में बेड पर पड़ा मिला। वह घर में अकेले ही रहता था और पत्नी-बच्चे दिल्ली में रहते हैं। रविवार को सुबह देर तक जब वह नहीं उठा तो पड़ोसी ने खिड़की से झांककर देखा। जिसके बाद घटना की सूचना पुलिस को दी गई। एसएसपी दिनेश सिंह फोरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस घर को सील कर जांच कर रही है। मृतक की पहचान विनोद चौधरी (49) निवासी जाहिदपुर कला गांव के रूप में हुई है। खुर्जा-जेवर क्षेत्र से ब्लॉक प्रमुख रह चुका है। बताया गया है कि मृतक के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज थे। हत्या के मामले में 15 साल पहले उसे उम्रकैद की सजा हुई थी। फिलहाल वह पैरोल पर बाहर था। पुलिस का कहना है कि हत्या के पीछे पुरानी रंजिश हो सकती है।

इस मामले में सुनाई थी सजा
खुर्जा नगर थाने में सतवीर सिंह ने 10 अगस्त, 2007 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें आरोप लगाया था कि उनके चाचा के बेटे बबलू की एक नवंबर 2006 को हत्या कर दी गई थी। जिसमें चश्मदीद गवाह उनका भाई कर्मवीर था। आरोपी लगातार कर्मवीर पर दबाव बना रहे थे कि वह कोर्ट में गवाही न दे, लेकिन कर्मवीर ने साफ कहा था कि उसने अपनी आंखों से आरोपियों को बबलू की हत्या करते देखा है। वह गवाही जरूर देगा। सतवीर सिंह, उनका भाई कर्मवीर और अन्य लोग 10 अगस्त 2007 को कचहरी में गवाही देने जा रहे थे। रास्ते में खुर्जा कोतवाली क्षेत्र के गांव जाहिदपुर के पास आरोपियों ने उन्हें घेर लिया और गोली मारकर कर्मवीर की हत्या कर दी। यह साजिश आरोपियों ने जेल से ही रची थी। मामले की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी माना। 2022 में अपर सत्र कोर्ट के न्यायाधीश हेमंत कुमार ने बंटी, रविंदर, विनोद, जितेंद्र, रानू, सुखवीर, विनोद पुत्र शिवचरन, कलुआ बिरजी और ओमवती को उम्रकैद और 10-10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।

पत्नी वर्ष 2000 में बनी थी ब्लॉक प्रमुख
विनोद चौधरी की पत्नी वर्ष 2000 में जेवर ब्लॉक से ब्लॉक प्रमुख बनी थीं। विनोद भी 2007 में खुर्जा से जिला पंचायत सदस्य बने और 2020-21 में भाजपा समर्थित खुर्जा ब्लॉक प्रमुख भी रह चुके थे। परिजनों के मुताबिक करीब एक साल पहले हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर आए थे। बड़े भाई सुधीर चौधरी ने बताया कि पारिवारिक विवाद के चलते पत्नी और बच्चे पिछले 7-8 साल से दिल्ली में रहते थे, जबकि विनोद जाहिदपुर कला स्थित मकान में नौकर अंकित के साथ रह रहे थे। शनिवार को नौकर छुट्टी पर घर गया था और अगले दिन सुबह लौटा ही नहीं। रविवार सुबह छोटे भाई बंटी उर्फ देवराज ने जब अपनी खाद-बीज की दुकान खोली तो पीछे का दरवाजा खुला पाया। अंदर जाकर देखा तो विनोद चौधरी का कमरा भी खुला था, जहां वे मृत अवस्था में पड़े मिले। इसके बाद तुरंत डायल-112 पर पुलिस को सूचना दी गई।

भाजपा ने सदस्यता दिलाई फिर कर दी निरस्त
भाजपा की ओर से 16 फरवरी 2025 को विनोद चौधरी को जिला स्तर पर सदस्यता दी गई थी। जब विनोद को हत्या के मामले में कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई तो सदस्यता को निरस्त कर दिया था।

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