मुख्यमंत्री सहित पुलिस के आला अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने की लगाई गुहार
टांडा, रामपुर – अकारण गाली-गलौज कर मारपीट करने व घसीटते हुए वाहन में बिठाकर थाना कोतवाली टांडा परिसर ले जाकर मोबाइल छीनकर जब्त कर प्रताड़ित करने का आरोप पुलिस पर लगाते हुए उत्तराखंड के जिला उधमसिंहनगर के माजरा, बाजपुर निवासी सुनील शर्मा पुत्र सुन्दर लाल शर्मा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक व पुलिस अधीक्षक रामपुर को शिकायत पत्र प्रेषित कर प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने एवं दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्यवाही करने की गुहार लगाई है !
पुलिस से बताया जान-माल का खतरा
पीडित सुनिल शर्मा ने मुख्यमंत्री सहित पुलिस के आला अधिकारियों को अवगत कराया है कि गत 27 अप्रैल को अपने निजी कार्य से थाना टांडा के अंतर्गत ग्राम बादली स्थित एच पी पैट्रोल पंप के आफिस में अपने मित्र से मिलने के लिए बैठा था, अचानक लगभग 3.30 पीएम पर थाना टांडा पुलिस के 3 दरोगा व 4 सिपाही सादा लिबास में निजी 2 वाहनों से पहुंचे और आफिस में घुसकर अकारण गाली-गलौज करने लगे, विरोध किया तो मारपीट कर घसीटते हुए वाहन में जबरदस्ती डालकर थाना टांडा परिसर ले आए जहां थाना कोतवाली प्रभारी ने मोबाइल छीन लिया और कान पर थप्पड मारकर प्रताड़ित किया जिससे सुनने की क्षमता भी प्रभावित हुई है ! पीडित सुनिल शर्मा ने अपने शिकायती पत्र में अवगत कराया है कि 27 अप्रैल से 29 अप्रैल की रात्री तक उसे बंधक बनाकर रखा गया
गुनहगार था तो पुलिस ने छोडा क्यों
सूत्रों से मिली जानकारी को सही मानें तो पीड़ित के खिलाफ थाना टांडा में कोई किसी प्रकार का मुकदमा दर्ज नहीं था तो सवाल तो बनता है कि ऐसा कारण क्या रहा जो पीड़ित के साथ पुलिस ने ऐसा कदम उठाया ? पीडित सुनिल शर्मा के मुताबिक उक्त घटित घटना की जानकारी मिलने पर कुछ गणमान्य व्यक्तिय थाना परिसर पहुंचे और उन्हीं के आग्रह पर पुलिस ने उसे थाने से बाहर जाने दिया ! पीडित के अनुसार पुलिस की कार्यशैली से उसे
सामाजिक, आर्थिक और मानसिक आघात पहुंचा है और तनाव में रहने के साथ साथ जान-माल के खतरा की आशंका से भयभीत हैं !
अब सवाल उठता है कि आखिर टांडा पुलिस द्वारा पीडित को गिरफ्त में लेकर थाने में बंधक बनाकर प्रताड़ित किया गया तो क्यों, क्या उसके खिलाफ कोई मुकदमा थाने में दर्ज था और यदि था तो पीडित को बिना कार्यवाही किए छोडा गया क्यों ? पूरे घटनाक्रम में खेला होना तो प्रतीत होता ही है ! लगता है कि खाकी यदि ठान ले तो किसी भी इज्जतदार की इज्जत पलभर में उतारकर धराशाई करने में सक्षम है हालांकि ऐसा करना मौलिक अधिकारों का हनन और पद का दुरुपयोग है लेकिन पुलिस तो पुलिस है डंडा जो है उसके हाथ में !







