सरकार के आदेश बेअसर, शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
बुलंदशहर (आनंद शर्मा): जिले में निजी स्कूलों की मनमानी चरम पर है। सरकार द्वारा बार-बार दिए जा रहे निर्देशों के बावजूद स्कूलों में NCERT की किताबें लागू नहीं हो पा रही हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार कौन है—स्कूल संचालक, बुक सेलर या शिक्षा विभाग?
बुक सेलर और स्कूल संचालकों की मिलीभगत का खेल
जिले में निजी स्कूलों और बुक सेलरों के बीच कथित मिलीभगत अब खुलकर सामने आ रही है।
स्कूल संचालक कुछ चुनिंदा दुकानों से ही किताबें खरीदने का दबाव बनाते हैं
बुक सेलर महंगे प्राइवेट कोर्स बेचने को मजबूर हैं
कमीशन के खेल में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है
इस पूरे सिस्टम में सबसे ज्यादा नुकसान अभिभावकों को झेलना पड़ रहा है, जो मजबूरी में महंगी किताबें खरीदने को विवश हैं।
NCERT की जगह प्राइवेट किताबें क्यों थोप रहे स्कूल?
सरकार की स्पष्ट गाइडलाइन के बावजूद स्कूलों में NCERT की बजाय प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लागू की जा रही हैं।
अधिक मुनाफा कमाने के लिए निजी प्रकाशकों की किताबें लागू
हर साल बदलते सिलेबस के नाम पर अतिरिक्त खर्च
अभिभावकों को कोई विकल्प नहीं दिया जाता
यह स्थिति शिक्षा के व्यवसायीकरण को साफ तौर पर दर्शाती है
शिक्षा विभाग की चुप्पी पर बड़े सवाल
इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
क्या स्कूलों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है?
क्या शिक्षकों की योग्यता और वेतन की जांच होती है?
बिना मानकों के स्कूल आखिर कैसे संचालित हो रहे हैं?
ऐसा प्रतीत होता है कि सरकारी आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई सख्ती नहीं दिख रही।
अभिभावकों की मजबूरी या लापरवाही?
कुछ हद तक अभिभावकों की भूमिका भी इस समस्या में अहम है।
निजी स्कूलों में पढ़ाने की बढ़ती होड़
मनमानी फीस और किताबों पर सवाल न उठाना
शिकायत करने से बचना
इसी चुप्पी का फायदा स्कूल संचालक उठा रहे हैं।
क्या हो सकता है समाधान?
इस गंभीर समस्या को खत्म करने के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे:
NCERT किताबें अनिवार्य रूप से लागू कराई जाएं
निजी स्कूलों का नियमित निरीक्षण हो
नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई
बुक सेलर और स्कूलों की मिलीभगत की जांच
अभिभावकों के लिए हेल्पलाइन और शिकायत तंत्र मजबूत किया जाए
निष्कर्ष: कब रुकेगा शिक्षा के नाम पर शोषण?
बुलंदशहर में शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे ये सवाल बेहद गंभीर हैं।
जब तक प्रशासन और शिक्षा विभाग सख्ती नहीं दिखाएंगे, तब तक
👉 निजी स्कूलों की मनमानी जारी रहेगी
👉 अभिभावकों का आर्थिक शोषण होता रहेगा
अब जरूरत है ठोस कार्रवाई की, ताकि शिक्षा को व्यापार बनने से रोका जा सके।








