अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक, युग निर्माण योजना मथुरा, गायत्री तपोभूमि वृंदावन रोड मथुरा, शान्ति कुंज हरिद्वार के सूत्र संचालक, परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा का जन्म शताब्दी बसंत पंचमी सन् 2026 के उपलक्ष्य में चल रहे आयोजन की श्रंखला में पितृ पक्ष का महत्व समझाया गया। वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के वरिष्ठ प्रतिनिधि अशोक कुमार गर्ग युग प्रहरी ने बताया कि यह कथा जनजन की व्यथा, व्यक्ति, परिवार, समाज एवं राष्ट्रीय समास्याओं का समाधान है। भारत देश धर्म प्रधान देश है। यहां के ऋषियों ने देश-काल की सीमाएं तोड़कर वसुधैव कुटुंबकम् का शंखनाद किया था। समस्त विश्व का कल्याण चाहने वालों ने भारतीय संस्कृति का वरण किया, सा प्रथमा संस्कृति विश्ववारा कहकर समस्त विश्व द्वारा सम्मानित किया गया। यह विश्व व्यापी बन गयी। कपिल, कणाद,पतंजलि, जैसे ऋषि दार्षनिक क्षुधा को तृप्तकर योग साधना सिखाते थे। वशिष्ठ, शतानंद, शुक्राचार्य, विदुर जैसै तपोनिष्ठ ऋषि धर्म तन्त्र एवं राज तन्त्र को दिशा देते थे। सा विद्या या विमुक्तये, कहते ऋषि महान। विद्या से ही होता है,मानव का कल्याण। शिक्षा मानव को नश्वर वस्तुओं की जानकारी कराती है। जब कि विद्या अमरता की ओर ले जाती है।

आज मनुष्य भौतिकता आकर्षण में भटक गया है परिणाम स्वरूप जो नहीं सोचना चाहिए, वह सोच रहा है, जो नहीं खाना चाहिए वह खा रहा है,जो नहीं पीना चाहिए, पी रहा है इसलिए अपने शरीर स्वास्थ्य को गवां रहा है। नाना प्रकार के व्यसनों फंसकर शारीरिक बीमारियां, मानसिक तनाव, धन की बरबादी पर तुला हुआ है। मनुष्य का जन्म सहज होता है, लेकिन मनुष्यता कठिन प्रयत्न से प्राप्त होती है। बदला जाय द्रष्टि कोण तो इंसान बदल सकता है और द्रष्टि कोण के परिवर्तन से सारा जहान बदल सकता है। यदि चाहते हो बने, संतति उच्च महान तो अभिभावक बन उसे, दो संस्कृति का ज्ञान। हमारे ऋषियों ने मनुष्य जीवन की सौ वर्ष की आयु मानकर चार भागों में विभाजित किया ब्रह्मचर्य, ग्रहस्थ, वानप्रस्थ ओर सन्यास प्रथम ब्रह्मचर्य आश्रम 25 वर्ष तक शिक्षा एवं विद्या का ज्ञान प्राप्त करना और स्वावलम्बी बनकर ग्रहस्थ की जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए माता, पिता की सेवा करना परम धर्म है। 50-75 वर्ष वानप्रस्थी साधक बनकर सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के सूत्रों को जन समुदाय तक पहुंचाने का प्रयास उसके उपरान्त सन्यास आश्रम रहते समाज, राष्ट्र को दिशा देना। उपस्थित सभी मातृ शक्तियों और देव तुल्य भाईयो पितृ पक्ष में अपने पितरों की शान्ति सद्गति और परिवार सुख शान्ति समृद्धि के लिये श्राद्ध, तर्पण, यज्ञ, दान का विधान बनाया है। पितर हमारे अदृश्य सहायक होते हैं उनके निमित्त श्रध्दा विश्वास और समर्पण की भावना से दान सुपात्रों को देना चाहिए तब आपको अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। पितरों की आत्म शांति के लिए और भारत माता की रक्षा करते हुए बलिदानों की शांति सद्गति के लिए गायत्री दीप महायज्ञ में भाव भरी आहुतियां समर्पित की। इस आयोजन के मुख्य यजमान बैंक आफ बड़ौदा के मैनेजर विकास शर्मा सपत्नि बने और स्नेहलता शर्मा आदि परिजनों का सराहनीय योगदान रहा।










