
लगाए गए कुल पौधों में से जिंदा बचे हैं कितने
खुर्जा , बुलंदशहर ( न. स. ) – पौधारोपण अभियान चलाने में सरकार हर साल करोड़ों रुपए खर्च करती होगी लेकिन शायद ही जायजा लिया हो कि लगाए गए कुल पौधों में जिंदा बचे हैं कितने ? अगर जायजा लिया जाए तो परिणाम चौंकाने वाला ही सामने आएंगे,, बशर्ते जायजा कागजों में नहीं धरातल पर लिया जाए ! गत वर्षों की बात छोड़िए बीते वर्ष 2025 में ही कुल कितनी वनभूमि पर कुल कितने पौधे शासनादेश पर वन विभाग द्वारा जिला बुलंदशहर में कहां कहां लगवाए गए और उनको लगवाने में कुल कितना रुपया सरकार का खर्च हुआ और अब लगाए गए कुल पौधों में से हैं जिंदा कितने, जानकारी ले लो जिला वनाधिकारी से ,सच सामने आ जाएगा लेकिन पंगा लेवे कौन और क्यों लेवे ? वो इसलिए कि होने को तो पूरे जिले में ही रोजाना कहीं न कहीं शासन द्वारा प्रतिबंधित पेडों का अवैध कटान होता है लेकिन ज्यादातर वनाधिकारी जुर्माना वहीं करते हैं जहां किसी के द्बारा शिकायत की गई होती है, हालांकि इस तर्क का कोई सबूत तो नहीं है लेकिन फिर भी हर इंसान का अपना जमीर तो है ही !
जिले में सरकार द्वारा प्रतिबंधित पेडों का अवैध कटान, जिम्मेदार कौन
बुलंदशहर जिला वनाधिकारी से यदि जिले में होने वाले प्रतिबंधित पेडों के अवैध कटान के संबंध में पूछा जाए तो जबाब एक ही मिलेगा कि गत वर्षो में लाखों से कहीं ज्यादा रुपए का जुर्माना अवैध कटान करने वालों से वसूला गया है लेकिन आपने पूछ लिया कि इस धनराशि में से कितनी धनराशि शिकायत के आधार वसूली गई है तो जबाब शून्य ही रहेगा,, इतना ही नहीं यही सवाल कोई जिला वनाधिकारी से पूछ ले कि जिले में कहीं भी वन विभाग की भूमि पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जा तो नहीं किया हुआ है, तो भी सच्चाई उजागर हो सकती है कि वनाधिकारी व वनकर्मी अपने कार्य के प्रति कितने समर्पित, दृढ़ संकल्प जागरूक हैं । कहने को तो सुना जाता है कि जिम्मेदार नागरिक होने के नाते गैर कानूनी कार्य होने की सूचना सम्बंधित विभाग के अधिकारी को दें, नाम गुप्त रखा जाएगा लेकिन वन विभाग एक ऐसा विभाग है कि यदि किसी के द्वारा प्रतिबंधित वृक्षों के अवैध कटान होने की सूचना दे दी तो मौके पर जाएंगे जरुर लेकिन लकड़ी माफिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज न कर अपना निजी लाभ प्राप्त कर विभाग के राजस्व को पलीता लगा देते हैं या कभी कभार हुआ दमदार शिकायतकर्ता तो दिखावे के लिए जहां होना चाहिए जुर्माना लाखों का ,बस कार्यवाही करने के नाम पर जुर्माना हजारों में कर इतिश्री कर देते हैं, इतना ही नहीं शिकायत कर्ता का नाम तक बता देते हैं जिससे शिकायतकर्ता और लकड़ी माफिया के बीच मनमुटाव ही नहीं आपसी रंजिश का होना तो पक्का है ! पता चला है कि इसी कड़ी में शिकायतकर्ता जेल तक का खाना खा चुके हैं !
वन भूमि पर कहीं अतिक्रमण तो नहीं
है तो अटपटा लेकिन ज्यादातर लोगों का मानना है कि कानून की धज्जियां लकड़ी माफिया वनविभाग और पुलिस के भ्रष्ट रिश्वतखोर अधिकारी व कर्मचारियों से मिलीभगत पर ही उडा रहे हैं क्योंकि पुलिस और वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी यदि अपना दायित्व ईमानदारी से निभाएं तो हो ही नहीं सकता कि लकडी माफिया सरकार द्वारा प्रतिबंधित वृक्षों का अवैध कटान कानून की धज्जियां उडा सकें !अपनी जिम्मेदारी को ताक पर रखकर अपने दायित्व को नहीं निभा रहे हैं और है भी यही सच कि वनकर्मी और पुलिसकर्मी यदि कमर कस लें कि सरकार द्वारा प्रतिबंधित पेडों का अवैध कटान नहीं होने देना है तो हो ही नहीं सकता कि लकड़ी माफिया कानून की धज्जियां उडा सकें ! लेकिन भ्रष्टाचार रुपी दलदल में फंसे जिम्मेदार विभागों के जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी को ताक पर रखकर कानून की धज्जियां लकड़ी माफियाओं से उड़वा ही नहीं रहे है बल्कि सुनी बात को सही मानें तो कभी कभार उनसे बेज्जत भी हो रहे हैं !









