मारुति सुजुकी:पहले फ्लेक्स-फ्यूल यात्री वाहन का शुभारम्भ: भारत के ऊर्जा परिवर्तन में नया अध्याय

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नई दिल्ली में देश के ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मारुति सुजुकी द्वारा निर्मित भारत के पहले फ्लेक्स-फ्यूल यात्री वाहन का शुभारम्भ किया गया। इस अवसर पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Nabin उपस्थित रहे।

यह लॉन्च भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, स्वच्छ ईंधन नीति और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

फ्लेक्स-फ्यूल वाहन क्या है?

फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे वाहन होते हैं जो ई20 से लेकर ई100 तक यानी 20% से 100% इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चल सकते हैं। इससे पेट्रोल पर निर्भरता कम होती है और इथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा मिलता है।

इस तकनीक को भारत के लिए एक गेमचेंजर माना जा रहा है क्योंकि यह ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती है।

किसानों की आय और ऊर्जा परिवर्तन पर जोर

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह केवल एक वाहन लॉन्च नहीं है, बल्कि भारत के ऊर्जा परिवर्तन के नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने बताया कि:

भारत में लगभग 37 लाख यात्री वाहन हैं
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से इथेनॉल की मांग बढ़ेगी
किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी
कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी

उन्होंने यह भी कहा कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ने भारत की ऊर्जा नीति को नई दिशा दी है।

इथेनॉल मिश्रण में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

भारत ने इथेनॉल मिश्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है:

2013-14 में इथेनॉल मिश्रण: 1.5% से कम
2025-26 में लक्ष्य: 20%
इथेनॉल खरीद: 38 करोड़ लीटर → 1040 करोड़ लीटर
उत्पादन क्षमता: 421 करोड़ लीटर → लगभग 2000 करोड़ लीटर

इस बदलाव से न केवल विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, बल्कि प्रदूषण में भी कमी आई है।

किसानों को 12,403 करोड़ रुपये का लाभ

सरकारी अनुमान के अनुसार, यदि भारत में नए दोपहिया और चारपहिया वाहनों का 50% हिस्सा फ्लेक्स-फ्यूल हो जाता है, तो:

311.8 करोड़ लीटर अतिरिक्त इथेनॉल की मांग पैदा होगी
किसानों को लगभग 12,403 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी
66.4 लाख मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी

इसे भारत के कृषि और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

ऊर्जा संकट में भारत की मजबूती

हरदीप सिंह पुरी ने वैश्विक ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारत ने:

एलपीजी और पेट्रोलियम की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखी
ईंधन की कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता रखी
आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया

उन्होंने सरकार की ऊर्जा नीति के तीन स्तंभ बताए—
उपलब्धता, सामर्थ्य और स्थिरता

ई85 नेटवर्क और भविष्य की योजना

सरकार अब देश में ई85 (85% इथेनॉल मिश्रण) के लिए मजबूत नेटवर्क तैयार कर रही है:

दिल्ली-एनसीआर और प्रमुख कॉरिडोर में 50-100 आउटलेट
2026 तक 500 आउटलेट
2027 तक लगभग 5000 आउटलेट का लक्ष्य

इसके साथ ही मूल्य सहायता, कर छूट और अवसंरचना विकास पर भी काम किया जा रहा है।

ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ा बदलाव

हाल ही में Maruti Suzuki India Limited और अन्य वाहन निर्माताओं द्वारा फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर जोर दिया जा रहा है। सरकार ने ऑटो कंपनियों से अपील की है कि वे:

अधिक फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल बाजार में लाएं
ईंधन विकल्पों को बढ़ावा दें
स्वच्छ गतिशीलता को अपनाएं
निष्कर्ष

भारत में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन का शुभारम्भ न केवल तकनीकी बदलाव है, बल्कि यह कृषि, पर्यावरण और ऊर्जा नीति का एक संयुक्त सुधार है। यह कदम आने वाले वर्षों में भारत को आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था से ऊर्जा आत्मनिर्भर राष्ट्र की ओर तेजी से ले जा सकता है।

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