टांडा, रामपुर (आनन्द शर्मा)। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान रोकने के लिए वर्ष 2008 में लागू किए गए कानून का उद्देश्य लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना और तंबाकू से होने वाली गंभीर बीमारियों पर अंकुश लगाना था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नगर टांडा सहित जिले के कई सार्वजनिक स्थानों पर आज भी खुलेआम धूम्रपान किया जा रहा है और जिम्मेदार विभाग इस ओर से लगभग बेखबर दिखाई दे रहे हैं।
सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) 2003 के तहत वर्ष 2008 से सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पूरी तरह प्रतिबंधित है। कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति सरकारी कार्यालय, अस्पताल, बस स्टैंड, पार्क, होटल, रेस्टोरेंट, सिनेमाघर या अन्य सार्वजनिक स्थल पर धूम्रपान करते हुए पकड़ा जाता है तो उस पर 200 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके बावजूद नगर टांडा में यह कानून प्रभावी रूप से लागू होता नजर नहीं आता।
कानून है, लेकिन पालन कौन कराए?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी कानून का पालन सुनिश्चित नहीं कराया जा सकता तो उसकी उपयोगिता क्या रह जाती है? वर्ष 2008 से लेकर अब तक लगभग दो दशक बीत चुके हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रमाण बहुत कम दिखाई देते हैं। आम लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शायद ही कभी देखने को मिलती है।
नगर के कई सरकारी कार्यालयों, बाजारों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर लोग खुलेआम सिगरेट और बीड़ी का सेवन करते दिखाई देते हैं। कई स्थानों पर धूम्रपान निषेध संबंधी बोर्ड भी नहीं लगे हैं, जबकि जहां बोर्ड लगे हैं वहां भी उनका पालन होता नजर नहीं आता।
तंबाकू बना गंभीर स्वास्थ्य संकट
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू सेवन कई घातक बीमारियों की प्रमुख वजह है। मुख कैंसर, गले का कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, टीबी, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियां तंबाकू सेवन से जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा धूम्रपान न करने वाले लोग भी परोक्ष धूम्रपान (Passive Smoking) के कारण प्रभावित होते हैं, जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू न केवल जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है बल्कि व्यक्ति की औसत आयु को भी कम कर सकता है। इसके बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान रोकने के लिए बनाए गए नियमों का पालन न होना चिंता का विषय है।
शुरुआती सक्रियता के बाद धीमी पड़ गई कार्रवाई
जब धूम्रपान निषेध कानून लागू हुआ था, तब सरकारी विभागों द्वारा जागरूकता अभियान चलाए गए थे। विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर और बैनर लगाए गए तथा लोगों को नियमों की जानकारी दी गई। हालांकि समय बीतने के साथ यह अभियान और निगरानी दोनों ही कमजोर पड़ते दिखाई दिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी नियमित निरीक्षण करें और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें तो स्थिति में काफी सुधार आ सकता है। लेकिन वर्तमान में ऐसी कार्रवाई बहुत कम दिखाई देती है, जिससे लोगों में कानून का भय लगभग समाप्त हो चुका है।
जागरूकता और सख्ती दोनों की जरूरत
सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान रोकने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए लगातार जनजागरूकता अभियान, नियमित निरीक्षण और नियमों का कड़ाई से पालन कराना भी आवश्यक है। यदि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाएं तो धूम्रपान की बढ़ती प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
नगरवासियों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों के खिलाफ नियमित कार्रवाई की जाए और जुर्माने की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए, ताकि लोगों में कानून के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।









