चिकित्सीय लापरवाही के आरोपों के बीच उठे स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल
टांडा, रामपुर। नगर टांडा में एक अपंजीकृत निजी अस्पताल में नवजात शिशु की मौत के बाद बड़ा बवाल खड़ा हो गया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर चिकित्सीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अस्पताल कर्मियों और परिजनों के बीच विवाद बढ़ गया, जिसके बाद पुलिस को मौके पर पहुंचकर हालात नियंत्रित करने पड़े। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आया और नगर में संचालित पांच अपंजीकृत अस्पतालों को सीज कर उनके संचालकों के खिलाफ पुलिस को तहरीर सौंप दी।
प्रसव के चार घंटे बाद बिगड़ी नवजात की तबीयत
जानकारी के अनुसार थाना भगतपुर क्षेत्र के गांव बहोरनपुर निवासी अय्यूब अपनी गर्भवती पत्नी मेहनाज को प्रसव के लिए टांडा-मुरादाबाद रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराकर लाए थे। शुक्रवार को मेहनाज ने एक नवजात शिशु को जन्म दिया। परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी।
परिजनों का आरोप है कि जन्म के लगभग चार घंटे बाद नवजात की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होते देख परिवार ने अस्पताल प्रशासन से जच्चा-बच्चा को किसी बड़े अस्पताल में रेफर करने की गुहार लगाई, लेकिन अस्पताल के चिकित्सक और स्टाफ ने अनुमति नहीं दी। आरोप है कि समय रहते उचित इलाज न मिलने के कारण नवजात की मौत हो गई।
मौत के बाद फूटा परिजनों का गुस्सा
नवजात की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। गुस्साए परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ हंगामा शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अस्पताल स्टाफ और परिजनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो बाद में पत्थरबाजी तक पहुंच गई। हालांकि समय रहते पुलिस मौके पर पहुंच गई और स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया। इस दौरान किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई, 5 अस्पताल सीज
घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने नगर में संचालित अवैध अस्पतालों के खिलाफ अभियान चलाया। छापेमारी के दौरान पांच अपंजीकृत अस्पतालों को सीज कर दिया गया। साथ ही संबंधित संचालकों के खिलाफ पुलिस को तहरीर देकर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
सूत्रों के अनुसार जिन अस्पतालों पर कार्रवाई की गई उनमें बादली स्थित एसआई नर्सिंग होम, टंडोला स्थित नवीन चाइल्ड क्लीनिक, झंडा चौक स्थित मून हेल्थ केयर जच्चा-बच्चा केंद्र, डिवाइन सिटी हॉस्पिटल और एक अन्य निजी अस्पताल शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग पर भी उठ रहे सवाल
हालांकि कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग अपनी पीठ थपथपाता नजर आ रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल भी उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि ये अस्पताल अपंजीकृत थे तो आखिर इतने लंबे समय से खुलेआम कैसे संचालित हो रहे थे? क्या विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही थी?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नगर में वर्षों से अवैध अस्पतालों और झोलाछाप चिकित्सकों के संचालन की शिकायतें सामने आती रही हैं। बावजूद इसके समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण आम लोगों की जान जोखिम में पड़ती रही है।
स्वास्थ्य अधीक्षक ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
सीएचसी टांडा के स्वास्थ्य अधीक्षक डॉ. सत्यपाल सिंह ने बताया कि बिना पंजीकरण अस्पताल, क्लीनिक और जच्चा-बच्चा केंद्र संचालित करने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अवैध रूप से अस्पताल चलाकर लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
समय रहते जागता विभाग तो शायद बच जाती एक जान
गौरतलब है कि पिछले माह भी क्षेत्र में झोलाछाप चिकित्सकों और अवैध अस्पतालों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे। स्थानीय मीडिया में महिलाओं के जीवन से खिलवाड़ और असुरक्षित प्रसव संबंधी खबरें प्रमुखता से प्रकाशित हुई थीं। यदि स्वास्थ्य विभाग उस समय ही प्रभावी कार्रवाई करता तो संभव है कि आज एक नवजात शिशु की जान बचाई जा सकती थी।
यह घटना केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर खड़ा हुआ एक बड़ा सवाल है कि आखिर कब तक अवैध अस्पतालों के भरोसे लोगों की जिंदगी दांव पर लगती रहेगी।













