बिना लाइसेंस कृषि कारोबार पर कब चलेगा विभागीय डंडा

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किसानों की जिंदगी से खिलवाड़ तो नहीं कर रहीं अवैध दुकानें?

टांडा, रामपुर (आनन्द शर्मा)। नगर टांडा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में खाद, बीज और कीटनाशक दवाओं की दुकानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। छोटे बाजारों से लेकर गांवों तक कृषि उत्पाद बेचने वाली दुकानें आसानी से दिखाई दे जाती हैं। किसानों की जरूरतों को पूरा करने के नाम पर चल रहे इस कारोबार के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर इन दुकानों में कितनी दुकानें सरकारी नियमों के अनुसार वैध लाइसेंस लेकर संचालित हो रही हैं और कितनी दुकानें विभागीय अधिकारियों के रहमोकरम पर धड़ल्ले से चल रही हैं।

कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि खाद, बीज और कीटनाशक दवाओं का कारोबार सीधे किसानों और उनकी फसलों से जुड़ा होता है। यदि बिना नियमों के दुकानें संचालित होंगी तो नकली या घटिया उत्पाद किसानों तक पहुंच सकते हैं, जिससे फसलें खराब होने के साथ किसानों को भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

लाइसेंस के बिना दुकान चलाना है गैरकानूनी

कृषि विभागीय नियमों के अनुसार खाद, बीज और कीटनाशक दवाओं की दुकान खोलने से पहले लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है। इतना ही नहीं, लाइसेंस प्राप्त करने के लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यता भी जरूरी है। जानकारी के अनुसार बीएससी कैमिस्ट्री या बीएससी एग्रीकल्चर की डिग्री रखने वाले व्यक्ति ही लाइसेंस के लिए पात्र माने जाते हैं।

इसके अलावा जिन कंपनियों की दवाएं और कृषि उत्पाद दुकान में रखे जाते हैं, उन कंपनियों का अधिकृत विक्रेता प्रमाणपत्र भी दुकानदार के पास होना चाहिए। बिना अधिकार पत्र के किसी कंपनी की दवा या उत्पाद बेचना नियमों का उल्लंघन माना जाता है।

लेकिन नगर टांडा और आसपास संचालित बड़ी संख्या में दुकानों को देखकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या सभी दुकानदारों के पास ये जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं?

किराए के लाइसेंस पर तो नहीं चल रहीं दुकानें?

क्षेत्र में चर्चा यह भी है कि कुछ लोग किसी अन्य व्यक्ति के लाइसेंस का सहारा लेकर दुकान चला रहे हैं। माना जा रहा है कि कई मामलों में लाइसेंस धारकों से किराए पर लाइसेंस लेकर कृषि कारोबार किया जा रहा है।

यदि ऐसा हो रहा है तो यह पूरी तरह नियमों के खिलाफ है। नियमों के अनुसार जिस व्यक्ति के नाम पर लाइसेंस जारी होता है, उसी की निगरानी में दुकान संचालित होना चाहिए। ऐसे में यह जांच बेहद जरूरी हो जाती है कि लाइसेंस धारक वास्तव में दुकान पर मौजूद रहता है या केवल कागजों तक ही सीमित है।

रिन्यूअल न कराने वालों पर भी सवाल

सूत्रों की मानें तो कुछ दुकानदार ऐसे भी हो सकते हैं जिन्होंने वर्षों पहले लाइसेंस बनवा लिया, लेकिन बाद में उसका रिन्यूअल नहीं कराया। इसके बावजूद दुकानें लगातार संचालित हो रही हैं।

यदि किसी लाइसेंस की वैधता समाप्त हो चुकी है और उसके बाद
भी दुकान चल रही है तो यह सीधे-सीधे विभागीय नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में कृषि विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ जाती है।

कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

नगर टांडा में जिस तेजी से खाद, बीज और कीटनाशक दवाओं की दुकानें बढ़ रही हैं, उससे लोगों के मन में कृषि विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। आखिर क्या विभागीय अधिकारी नियमित रूप से दुकानों की जांच कर रहे हैं? क्या सभी दुकानों के लाइसेंस और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है? या फिर कुछ दुकानदारों को संरक्षण देकर नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है?

यदि समय रहते विभाग ने गंभीरता नहीं दिखाई तो किसानों को नकली बीज, घटिया खाद और गलत कीटनाशक दवाओं का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

किसानों ने की निष्पक्ष जांच की मांग

स्थानीय किसानों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि जिला कृषि अधिकारी विशेष अभियान चलाकर नगर टांडा और आसपास संचालित सभी खाद, बीज और कीटनाशक दवा दुकानों की जांच कराएं। जिन दुकानों के पास वैध लाइसेंस या आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

किसानों का कहना है कि कृषि क्षेत्र से जुड़े कारोबार में पारदर्शिता बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर किसानों की मेहनत और फसलों पर पड़ता है। यदि अवैध दुकानों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में किसानों की समस्याएं और बढ़ सकती हैं।

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