Bulandshahar news:बाल श्रम पर कब चलेगा प्रशासन का डंडा?

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गरीब के बच्चों से छीने जा रहे हैं उनके अधिकार

बुलंदशहर( आनन्दशर्मा )-
पढने- लिखने की उम्र में जहां बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए वहीं श्रम विभाग के कुछ अधिकारियों का निकम्मापन कहिए या उनकी लापरवाही को चलते बाल श्रम कराया जाता है, इस दावे को झुठलाया नहीं जा सकता है ! छोटे-छोटे बच्चे कहीं न कहीं चाय की दुकानों पर या होटल और ढाबों पर एवं कबाड कारोबार गोदामों पर मजदूरी करते देखे जा सकते हैं !

गरीबी बन रही सबसे बड़ी मजबूरी

हालांकि कभी कभार अभियान चलाकर श्रम विभाग बच्चों को श्रम मुक्त कराता रहता है लेकिन बाल श्रम पर अंकुश लगाने में नाकाम ही प्रतीत होता है और इसका सबसे बड़ा कारण लगता है गरीबी ! जगजाहिर है कि भूंख तो सभी को लगती है और भूंख मिटाने के लिए गरीब करे तो क्या, रहने को घर, पहनने को कपड़ेऔर पेट की भूंख रुपी आग मिटाने को रोटी देने में रहता है अक्षम तो फिर पढ़ाने का बंदोबस्त कर कैसे सकता है ?यही सबसे बड़ा कारण है कि गरीब अपने बच्चों से बाल श्रम कराने को मजबूर होता है और छोटे छोटे होटल एवं ढाबों पर बाल श्रम होता हुआ अक्सर देखने को मिल ही जाएगा बस देखने के लिए नजर का होना जरूरी है !

बाल श्रम कराने वालों पर सख्त कार्रवाई जरूरी

सरकार ढिंढोरा पीटने में पीछे नहीं है कि गरीब के लिए ये योजना शुरू की है और वो योजना शुरू करने वाली है लेकिन धरातल पर सम्बंधित विभाग के अधिकारी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में सफल हो रहे हैं या फिर पलीता लगा रहे हैं,यह भी तो देखना चाहिए ! कुछ बुद्धिजीवी लोगों का कहना रहा कि वास्तव में ही बाल श्रम पर अंकुश लगाना है तो होटल,ढाबे और अन्य स्थानों पर विभागीय अधिकारी छापे मारकर जहां भी बाल श्रम मिले मुक्त कराए और बच्चों के खान-पान की व्यवस्था कर स्कूलों में भिजवाने का कार्य करें ! जिससे ऐसे बच्चों का भविष्य सुधर सके साथ – साथ ही छापामार कार्यवाही के दौरान जहां भी जो बाल श्रम कराता पकडा जाए उसके खिलाफ विभाग कानूनी कार्यवाही करे तो शायद बाल श्रम पर अंकुश लग सके!

 

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