Uttar Pradesh news today:सत्ता का असर या सिस्टम पर सवाल? विधायक पुत्र की ‘दबंग एंट्री’ से अस्पताल में हड़कंप

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टांडा (रामपुर) – उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सत्ता के प्रभाव और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वार-टांडा विधानसभा सीट से विधायक शफीक अंसारी के पुत्र की अचानक एंट्री ने अस्पताल में अफरातफरी मचा दी।

 

अचानक एंट्री से अस्पताल में मचा हड़कंप

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विधायक पुत्र बिना किसी पूर्व सूचना के गनरों के साथ, विधायक का स्टीकर लगी गाड़ी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचा। जैसे ही वह अस्पताल परिसर में दाखिल हुआ, स्टाफ और मरीजों के बीच हलचल तेज हो गई।

वार्ड में पहुंचकर मरीजों से की पूछताछ

विधायक पुत्र ने सीधे अस्पताल के वार्डों में जाकर भर्ती मरीजों से बातचीत की और सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। पहली नजर में यह एक निरीक्षण जैसा लगा, लेकिन आगे जो हुआ उसने पूरे मामले को विवादों में डाल दिया।

अधीक्षक की कुर्सी पर बैठकर दिए निर्देश

मामला तब गरमा गया जब विधायक पुत्र चिकित्सा अधीक्षक की कुर्सी पर बैठ गया और दस्तावेजों की जांच करने लगा। इस दौरान अधीक्षक खुद बगल में खड़े रहे। यही नहीं, उन्होंने स्टाफ को सख्त निर्देश भी दिए—

बाहर की दवाइयां न लिखने के आदेश
सभी टेस्ट अस्पताल में ही कराने के निर्देश
सफाई व्यवस्था को बेहतर रखने की हिदायत

किस अधिकार से चला ‘निरीक्षण’?

सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर किस अधिकार के तहत विधायक का पुत्र सरकारी अस्पताल में इस तरह दखल दे सकता है? क्या यह प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन नहीं है?

🚔 गनरों की मौजूदगी ने बढ़ाया विवाद

मामले को और गंभीर तब माना गया जब विधायक की सुरक्षा में तैनात गनर भी उनके पुत्र के साथ नजर आए। नियमों के मुताबिक, गनर केवल जनप्रतिनिधि की सुरक्षा के लिए होते हैं, न कि उनके परिवार के लिए। ऐसे में यह सुरक्षा संसाधनों के दुरुपयोग का मामला बनता दिख रहा है।

जनता और नेताओं में बढ़ा आक्रोश

इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर नाराजगी बढ़ गई है। सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर ऐसे मामलों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सिस्टम के लिए खतरनाक संकेत है।

ऐसा मामला पहले कभी नहीं देखा” – आदेश शंखधार

अन्तर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष आदेश शंखधार ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा मामला आज तक न कभी सुनने में आया और न ही देखने को मिला, जहां किसी विधायक, सांसद या मंत्री के बेटे ने इस तरह का व्यवहार किया हो। उन्होंने कहा कि यदि विधायक ने अपने पुत्र को प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त भी किया है, तब भी इस तरह का रवैया पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग करने की बात भी कही।

गनरों का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं” – खालिद अली

नगरपालिका नरपतनगर के चेयरमैन खालिद अली ने भी इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि विधायक की सुरक्षा में तैनात गनरों का इस तरह उपयोग किया जाना पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि गनर केवल विधायक की सुरक्षा के लिए होते हैं, न कि उनके परिजनों के साथ घूमने के लिए।
खालिद अली ने यह भी कहा कि चिकित्सा अधीक्षक द्वारा अपनी कुर्सी पर विधायक पुत्र को बैठाकर खुद बगल में खड़े रहना न केवल पद की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि कानून संगत भी नहीं है।

अधीक्षक की भूमिका भी संदेह के घेरे में

उन्होंने आगे आशंका जताई कि अस्पताल में मौजूद खामियों को छुपाने या लीपापोती करने के उद्देश्य से इस तरह की ‘जी-हुजूरी’ की गई हो सकती है। ऐसे में चिकित्सा अधीक्षक की भूमिका भी संदिग्ध नजर आती है और इसकी भी जांच होनी चाहिए।

जांच की मांग तेज, प्रशासन चुप

घटना के बाद अब तक किसी भी अधिकारी या संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यही चुप्पी इस पूरे मामले को और ज्यादा संदिग्ध बना रही है।

📢 क्या होगी कार्रवाई या मामला दबेगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी, या फिर यह मामला भी समय के साथ दबा दिया जाएगा

 

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